मंथन

“मंथन” मोहनदास गाँधी (महात्मा) व रबिंद्रनाथ ठाकुर (गुरुदेव) के मध्य हुए पत्राचार एवं उनके द्वारा लिखे गए कुछ निबंधों का हिंदी-अनूदित संकलन है।